दीवाने हैं
हम में तुम में हम सभी में, प्यार असर कर जायेगा
दीवाने हैं दीवानों पर कौन सितम कर पायेगा
यारी में जब भी कभी , मौत दर पे आयेगी
दावा है कि तुमसे पहले मेरा सर ले जायेगी
जुदा होने की बात चली हो जो होगा हो देखेंगे
साथ रहेंगी जब तक दम हो कौन नज़र कर पाएगा
दीवाने हैं दीवानों पर कौन सितम कर पायेगा
लोग करेंगे चमचागीरी, अपनी दादागीरी सही
इन सालों की ऐसी तैसी वक्त ही कर जायेगा
यारी अपनी दुनियादारी, मस्ती के हैं राही हम
अपना हंसता चेहरा औरों पे असर कर जायेगा
दीवाने हैं दीवानों पर कौन सितम कर पायेगा
Friday, April 4, 2008
Saturday, March 15, 2008
मां होती तो क्या होता
सोचता हूं
मां होती तो क्या होता
ज़मीं होती आसमां होता
आंचल की छांव घना होता
बेगाने से इस बेरहम शहर में
कोई न कोई अपना होता
सोचता हूं
मां होती तो क्या होता
नहीं कुछ बुरा सब भला होता
सपनों का गांव बसा होता
वीराने से इस तपते शहर में
अपना भी कोई निशां होता
सोचता हूं
मां होती तो क्या होता
जगमग सारा शमां होता
सूरज का घर बना
काले कलूटे बेशरम शहर में
दूश्मन के दिल में वफ़ा होता
सोचता हूं
मां होती तो क्या होता
चुल्हे पर बर्तन चढा होता
दाल रोटी पका होता
तडपते बिलखते भूखे शहर में
शायद ही कोई भूखा होता
सचमुच
मां होती तो क्या होता!
सोचता हूं
मां होती तो क्या होता
ज़मीं होती आसमां होता
आंचल की छांव घना होता
बेगाने से इस बेरहम शहर में
कोई न कोई अपना होता
सोचता हूं
मां होती तो क्या होता
नहीं कुछ बुरा सब भला होता
सपनों का गांव बसा होता
वीराने से इस तपते शहर में
अपना भी कोई निशां होता
सोचता हूं
मां होती तो क्या होता
जगमग सारा शमां होता
सूरज का घर बना
काले कलूटे बेशरम शहर में
दूश्मन के दिल में वफ़ा होता
सोचता हूं
मां होती तो क्या होता
चुल्हे पर बर्तन चढा होता
दाल रोटी पका होता
तडपते बिलखते भूखे शहर में
शायद ही कोई भूखा होता
सचमुच
मां होती तो क्या होता!
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