......सा है
चाँद अनकहा सा है
खामोशी कहकहा सा है
शोर की है एक जुबां
आँखों से कुछ बहा सा है
नीद गीली गीली सी
धूप ढीली ढीली सी
रात अब चला सा है
शाम कुछ ढला सा है
ज़मी की कमी सी है
भूख अब बला सी है
कोना कोना चुप है
दिल भी कुछ रोया सा है
pti
Saturday, June 21, 2008
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